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13000 कच्चे अध्यापकों का धरना 12वें दिन में प्रवेश

मोहली 27 जून (विजय)। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के पास स्थित शिक्षा सचिव के कार्यालय वाली सातवीं मंजिल पर पेट्रोल की बोतले लेकर चढ़े कच्चे अध्यापकों और हजारों की संख्या में शिक्षा भवन के सामने बैठे अध्यापकों का धरना रविवार को 12वें दिन में प्रवेश कर गया। लेकिन अध्यापकों की मांगों के बारें में अभी तक कोई उचित फैसला न होने के चलते मजबूर हो कर रविवार को भी अध्यापकों की ओर से धरना स्थल से लेकर लाइटों पर एक विशाल रोष मार्च निकाला गया। इस विशाल रोष मार्च को बीएड फ्रंट के सूबा प्रधान हरविंदर सिंह बिलागा, जूझार सिंह व अन्य यूनियन लीडरों ने संबोधित किया और पंजाब सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।  गौरतलब है कि मजदूर से भी कम वेतन पा रहे राज्य के 13000 कच्चे (अस्थायी) अध्यापक 12 दिनों से शिक्षा विभाग का घेराव करके बैठे हैं। इन दौरान दो बार आश्वासन देने के बावजूद शिक्षा मंत्री बैठक के लिए नहीं पहुंचे। हैरानी की बात यह है कि सरकार अपने द्वारा तय न्यूनतम वेतन के नियम को इन कच्चे अध्यापकों पर लागू क्यों नहीं कर रही। सरकार के रवैये से मायूस कच्चे अध्यापक अब मांगे पूरी होने तक संघर्ष के मूड में हैं। सरकार की तरफ से इन प्रदर्शनकारियों को मंगलवार तक का समय दिया गया है। यूनियन लीडरों के मुताबिक राज्य में इस समय 13000 कच्चे अध्यापक हैं। जो पांच श्रेणियों के तहत राज्य के सरकारी प्राइमरी स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ये कच्चे अध्यापक शिक्षा प्रोवाइडर, ईजीएस, एआईई, एसटीआर व आईईवी श्रेणियों के तहत अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वर्ष 2003 में इन कच्चे अध्यापकों की नियुक्ति शुरू हुई थी, जो वर्ष 2011 तक चली। ईटीटी, एनटीटी या बीएड शिक्षित ये कच्चे अध्यापक एक मजदूर से भी कम वेतन पर काम कर रहे हैं। मूक-बधिर बच्चों को पढ़ाने वाले कच्चे अध्यापकों को मात्र 5500 रुपए प्रतिमाह वेतन मिल रहा है। इसी तरह प्राइमरी स्कूलों में सेवाएं दे रहे कच्चे अध्यापकों को 6000 रुपए प्रतिमाह व शिक्षा प्रोवाइडरों को अधिकतम 10000 रुपए प्रतिमाह वेतन मिल रहा है।

जबकि छठे वेतन आयोग की सिफारिशें मंजूर होने पर सरकारी कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 18000 रुपए प्रतिमाह हो जाएगा। ऐसे में सरकार के लिए शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे इन कच्चे अध्यापकों के वेतन के अंतर को साफ समझा जा सकता है। कच्चे अध्यापकों की संघर्ष कमेटी के स्टेट कनीवनर दविंदर सिंह संधु कहते हैं कि सरकार की उपेक्षा झेलते हुए पिछले 18 सालों से कच्चे अध्यापक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनका कहना है कि जो वेतन कच्चे अध्यापकों को दिया जाता है उसमें एक परिवार को पालन पोषण करना संभव नहीं है। सरकार की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 12 दिनों से शिक्षा विभाग का घेराव करके बैठे इन कच्चे अध्यापकों को दो बार शिक्षा मंत्री ने बैठक के लिए बुलाया, लेकिन दोनों बार शिक्षा मंत्री विजय इंदर सिंगला बैठक के लिए नहीं पहुंचे। प्रदर्शनकारियों की बैठक आला अधिकारियों के साथ ही हुईं। जिन्होंने सरकार के पाले में गेंद डाल कर कच्चे अध्यापकों को आश्वासन ही दिया है। शुक्रवार को हुई बैठक में मंगलवार तक के लिए आश्वासन दिया गया है। रोष प्रर्दशनकारियों ने बताया कि वर्ष 2011 में कच्चे अध्यापकों की नियुक्ति बंद होने के बाद से ही इनका संघर्ष शुरू हो गया था। समान वेतन व नियमित किए जाने की मांग को लेकर कच्चे अध्यापक पिछले 10 सालों से संघर्ष कर रहे हैं। इस दौरान कई कच्चे अध्यापकों ने सरकार की अनदेखी से तंग आकर जान तक देने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगों को जल्द से जल्द पूरा न किया और उनको पक्का न किया गया तथा उनके वेतन न बढ़ाए गए तो वह पंजाब में होने वाली आगामी विधानसभा चुनाव में पंजाब सरकार से इसका एक -एक हिसाब लेगें। उन्होंने कहा कि संघर्ष इसी तरह आगे भी जारी रहेगा और संघर्ष को और तेज ़ करने के लिए अन्य रास्ते को भी अख्तियार किया जाएगा।

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