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एक शाम वन्य जीवों के नाम.. पंजाब सरकार व एस एस फाउंडेशन मनांजलि मंच चंडीगढ़ के संयुक्त तत्वाधान में एक ऑनलाइन काव्य संध्या का आयोजन

मोहाली 7 अक्तू बर (विजय)। छतबीड़ जू पंजाब सरकार व एस एस फाउंडेशन मनांजलि मंच चंडीगढ़ के संयुक्त तत्वाधान में एक ऑनलाइन काव्य संध्या का आयोजन किया गया। यह आयोजन छतबीड़ जू के मैनेजमेंट व एजुकेशन अफसर हरपाल सिंह व लुधियाना की यूरोलॉजिस्ट डॉ मोनिता धीमान द्वारा किया गया। आरंभ में मनांजलि मंच की संस्थापिका श्रीमती संतोष गर्ग ने मंच संचालन करते हुए कहा कि हमारी पुरातन परंपरा रही है कि पेड़- पौधे, जानवर, जलचर पक्षियों के साथ रहना और उनकी सुरक्षा करना। हिंदू धर्म में सभी देवी- देवताओं के पास कोई ना कोई जीव- जंतु वाहन के रूप में रहा है।
महासचिव डॉक्टर सुनयना बंसल ने कहा कि हम शहरों में रहने वाले लोग मूक जीवों की व्यथा नहीं समझते। वरिष्ठ कवि बालकृष्ण गुप्ता ने कहा कि मानव जगह-जगह पैर पसार रहा है और जंगल कट रहे हैं। नेहा शर्मा ने कहा कि वन्य जीवों के बिना हमारा अस्तित्व खतरे में है। अरुणा डोगरा ने कहा कि हम पेड़ काट रहे हैं और उनके घोंसले समाप्त हो रहे हैं। कवयित्री नीरजा शर्मा ने बुड्ढे शेर की व्यथा सुनाते हुए कहा, मैं जंगल का राजा हूं, प्रजा मेरी कोई नहीं। इससे तो अच्छा मानव है जो पालता है और पेट भरता है। पंचकूला की कवयित्री संगीता राय ने कहा कि अपना घर बनाते हो, उनका घर उजाड़ कर। अमित ने भी वन्य जीवों की सुरक्षा हेतु अपने विचार प्रकट किए। डॉक्टर अनीश गर्ग ने कहा कि हे प्राणी! मूक प्राणी की सुन फरियाद। साइकिल गिरी ग्रुप की, अखिला ने वन्य जीवों पर आधारित बनाई गई पेंटिंग भी सभी के सामने प्रस्तुत की। इस अवसर पर अर्जुन गोयल, हरदीप सिंह, दीपा कौशिक व अन्य वन्यजीव प्रेमियों ने भी भाग लिया। अंत में छतबीड़ जू के अफसर हरपाल सिंह जी ने कहा कि छतबीड़ जू में आगे से ऐसे कवि सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा।

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